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NEET में अच्छा स्कोर, फिर भी रद्द होगा छात्रा का MBBS एडमिशन, कोर्ट में पता चला- कितने साल का होता है 1st ईयर

MBBS 1st ईयर की पढ़ाई कितने साल की होती है? बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद, सभी मेडिकल स्टूडेंट्स या डॉक्टर बनने का सपना देख रहे युवाओं को लिए इस सवाल का जवाब जानना जरूरी हो जाता है। क्योंकि नीट में अच्छा स्कोर करने…

6 सितंबर 2026 को 08:29 pm बजे
NEET में अच्छा स्कोर, फिर भी रद्द होगा छात्रा का MBBS एडमिशन, कोर्ट में पता चला- कितने साल का होता है 1st ईयर

सौजन्य से:- Navbharat Times

MBBS 1st ईयर की पढ़ाई कितने साल की होती है? बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद, सभी मेडिकल स्टूडेंट्स या डॉक्टर बनने का सपना देख रहे युवाओं को लिए इस सवाल का जवाब जानना जरूरी हो जाता है। क्योंकि नीट में अच्छा स्कोर करने के बाद भी एक छात्रा का एमबीबीएस एडमिशन रद्द होने वाला है।

MBBS Study Rule: अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET UG) काफी टफ एग्जाम माना जाता है। हर साल लाखों उम्मीदवार डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट यूजी परीक्षा में बैठते हैं। उनमें से बहुत कम स्टूडेंट्स को सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की सीट मिलती है। लेकिन एक छात्रा का नीट में अच्छा स्कोर था, फिर भी एमबीबीएस एडमिशन रद्द होने जा रहा है, क्योंकि छात्रा ने एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई पूरी करने में ज्यादा समय ले लिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट आए MBBS 1st ईयर की छात्रा के मामले के बाद, मेडिकल स्टूडेंट्स या मेडिकल फील्ड में जाने का सपना देख रहे युवाओं को यह पता होना चाहिए कि एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई कितने साल में पूरी होनी चाहिए?

क्या है मामला?

दरअसल, एक छात्रा को NEET UG में अच्छे स्कोर के आधार पर अगस्त 2023 में महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (MUHS) में एमबीबीएस सीट मिली थी। छात्रा ने एनाटॉमी को छोड़कर अन्य सभी विषयों के इंटरनल असेसमेंट पास लिए थे। लेकिन एनाटॉमी की मुख्य परीक्षा में बार-बार देने के बावजूद, थ्योरी क्लियर नहीं कर सकी। इसके बाद MUHS कॉलेज ने छात्रा को अगली परीक्षा में बैठने से रोक दिया। जिसके खिलाफ छात्रा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कोर्ट में पता चला MBBS 1st ईयर में 4 साल से ज्यादा नहीं

छात्रा के मामले में सुनवाई के दौरान, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि एमबीबीएस कोर्स में पढ़ने वाले किसी भी स्टूडेंट को फर्स्ट ईयर की पढ़ाई करने के लिए 4 साल से अधिक समय या अटेंप्ट नहीं दिया जा सकता है। जस्टिस फिरदौस पी. पूनीवाला और जस्टिस आर. आई. चागला की बेंच ने साफ किया कि 4 अटेंप्ट की यह सीमा इस बात पर निर्भर नहीं करती है कि स्टूडेंट ने किस प्रयास में कौन-कौन से विषयों की परीक्षा दी थी।

एमबीबीएस छात्रा की याचिका खारिज

कोर्ट ने एमबीबीएस फर्स्ट ईयर की पढ़ाई 4 साल या अटेंप्ट की सीमा के आधार पर छात्रा की याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, छात्रा का तर्क ता कि उसने विशेष रूप से एनाटॉमी का पेपर सिर्फ तीन बार दिया है, इसलिए उसे इस विषय के लिए चौथा मौका मिलना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने ग्रेजुए मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 2023 के रेगुलेशन 21 का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट ने कहा कि नियमों के तहत किसी भी हालात में स्टूडेंट को फर्स्ट ईयर पास करने के लिए 4 से ज्यादा मौके नहीं दिए जा सकते, चाहे उसने अलग-अलग अटेंप्ट में किसी भी विषय गकी परीक्षा दी हो। कोर्ट ने साफ किया कि क्योंकि छात्रा अपने चार अटेंप्ट पूरे कर चुकी है, इसलिए उसे एनाटॉमी के लिए अतिरिक्त मौका नहीं दिया जा सकता है।

MBBS की पढ़ाई कितने साल की होती है?

देश में MBBS की पूरी पढ़ाई में कुल मिलाकर 5.5 से 6 वर्षों तक का समय लग जाता है। इसमें से 4.5 साल पढ़ाई करनी पड़ती है और फिर 1 साल में इंटर्नशिप करनी होती है। उसके बाद एमबीबीएस का कोर्स पूरा होता है। 'ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशंस (अमेंडमेंट) 2023' में यह स्पष्ट किया गया है कि एमबीबीएस छात्रों को अनिवार्य 'रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप' सहित कोर्स पूरा करने के लिए अधिकतम 10 साल का समय मिलेगा।

लेखक के बारे मेंअमन कुमारअमन कुमार, डिजिटल में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रॉड्यूसर पद पर हैं। शिक्षा और रोजगार जगत की खबरों के अनुभवी लेखक अमन को न्यूज वर्ल्ड में करीब 10 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है। वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। साल 2015 में साधना न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत करते हुए टीवी चैनल आउटपुट डेस्क और 'मानव को शांति कहां' मासिक पत्रिका से लेखन शैली को समझा। इसके बाद लाइव न्यूज हिंदी (लाइव इंडिया), जनसत्ता.कॉम, आजतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहकर ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे। कई साल के अनुभव से अमन पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं। अमन रिपोर्ट्स बेस्ड, सटीक और विश्वसनीय जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। उनकी प्राथमिकता यूजर्स तक सही जानकारी को सरल शब्दों में समझाना रही है।

अमन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों जैसे स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षा, प्रवेश परीक्षा, सरकारी नौकरी, सरकारी रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स एंड ऑप्शंस, करेंट अफेयर्स, जनरल नॉलेज, सक्सेस स्टोरीज समेत कई टॉपिक्स पर गहरी सोच और समझ के साथ व्यापक कवरेज करते हैं। टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स, करियर काउंसलर की सलाह और टिप्स के जरिए स्कूल की खबरों से लेकर IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT, CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा एसससी, यूपीएससी, बैंक, पुलिस समेत भारत और राज्य स्तर की सरकारी नौकरियों के बारे में विस्तार और गहराई से लिखते हैं।

गवर्नमेंट जॉब, प्राइवेट जॉब, स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक की फील्ड में काम करते हुए अमन ने भारत के प्रमुख शिक्षा बोर्ड CBSE के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज, दिल्ली यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एडमिशन्स प्रोफेसर हनीत गांधी और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का खास इंटरव्यू कर स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी कंटेंट वाले ऑथेंटिक आर्टिकल्स लिखे हैं। इसके अलावा ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के प्रवक्ताओं का इंटरव्यू लिया है। सीबीएसई, रीट, नीट, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉपर्स से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार करते रहे हैं। ताकि उनके टिप्स और सलाह से बाकी युवाओं के करियर को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

दिल्ली में जन्मे अमन कुमार की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में B.A. ऑनर्स की डिग्री हासिल की। फिर डीयू के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उसके बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। ये डिग्रियां अमन को हिंदी पत्रकारिता की वो एक्सपर्टीज देती हैं जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल (5 Ws+1H) यानी क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के पैमानों के आधार पर न्यूज राइटिंग के लिए जरूरी हैं... और पढ़ें

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