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कौन हैं जस्टिस हरीश कुमार, जिन्हें बिहार सरकार ने बनाया परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष

बिहार सरकार ने प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए गठित 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश हरीश कुमार को मनोनीत किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अ…

2 सितंबर 2026 को 04:29 am बजे
कौन हैं जस्टिस हरीश कुमार, जिन्हें बिहार सरकार ने बनाया परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष

सौजन्य से:- Navbharat Times

बिहार सरकार ने प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए गठित 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश हरीश कुमार को मनोनीत किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार ये समिति तीन महीने में अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी।

पटना: बिहार में प्रतियोगिता परीक्षा में सुधार के लिए गठित विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश हरीश कुमार होंगे। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी। विशेषज्ञ समिति को गठन के बाद तीन माह के अंदर अपनी अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपनी है। राज्य सरकार के अधीन विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और अन्य भर्ती एजेंसियों द्वारा ली जाने वाली परीक्षाओं में व्यापक सुधार की अनुशंसा के लिए पांच सदस्यीय परीक्षा सुधार पर विशेषज्ञ समिति के गठन का प्रावधान है।

न्यायमूर्ति हरीश कुमार को परीक्षा सुधार समिति की कमान

बिहार में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 1 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हरीश कुमार को इस पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। इससे पहले, 23 अगस्त 2026 को इस समिति के गठन का प्रावधान किया गया था। हाईकोर्ट के महानिबंधक की ओर से न्यायमूर्ति हरीश कुमार के नाम का प्रस्ताव भेजे जाने के बाद सरकार ने आधिकारिक तौर पर उन्हें अध्यक्ष नोटिफाई कर दिया।

महाधिवक्ता से मांगी गई थी अध्यक्ष पद के लिए अनुशंसा

विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष चयन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने 24 अगस्त 2026 को पटना हाईकोर्ट के महाधिवक्ता से अनुशंसा का अनुरोध किया था। इसके बाद, 28 अगस्त 2026 को पटना हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति हरीश कुमार के नाम की सिफारिश राज्य सरकार को भेजी। हाईकोर्ट की इस संस्तुति को स्वीकार करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सोहैल के हस्ताक्षर से यह आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई। समिति को अपने गठन के दिन से तीन माह के भीतर अपनी विस्तृत अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

परीक्षा सुधार विशेषज्ञ समिति के मुख्य उद्देश्य और काम

परीक्षा एजेंसियों का मूल्यांकन: BPSC, BPSSC, पुलिस भर्ती बोर्ड, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और विश्वविद्यालयों की भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा करना।

प्रश्नपत्रों और केंद्रों की सुरक्षा: प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परीक्षा केंद्रों के प्रबंधन को अधिक मजबूत बनाना।

तकनीकी और व्यवस्थागत सुधार: परीक्षाओं के सफल संचालन के लिए आधुनिक तकनीकी व्यवस्था और अभ्यर्थियों की सुविधाओं में सुधार लाना।

पारदर्शिता बढ़ाना: परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करना और पूरे सिस्टम को विश्वसनीय बनाना।

अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम

बिहार में हर साल विभिन्न बोर्डों, आयोगों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य परीक्षा संचालन में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना और संपूर्ण प्रक्रिया को अभ्यर्थियों के अनुकूल बनाना है। विशेषज्ञों की यह समिति राज्य के प्रशासनिक और भर्ती ढांचे को नए सिरे से पारदर्शी बनाने की दिशा में काम करेगी। माना जा रहा है कि समिति की सिफारिशें लागू होने के बाद बिहार में आने वाली सभी प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन अधिक निष्पक्ष और सुरक्षित वातावरण में संभव हो सकेगा।

लेखक के बारे मेंसुनील पाण्डेयसुनील पाण्डेय, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में बतौर सीनियर जर्नलिस्ट कार्यरत हैं। जनवरी 2021 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप का हिस्सा बने सुनील वर्तमान में NBT ऑनलाइन की बिहार-झारखंड टीम में संपादकीय और रिपोर्टिंग में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रणनीतिक न्यूज़ प्लानिंग, सटीक संपादन और धारदार ग्राउंड रिपोर्टिंग उनकी विशेष पहचान है। राजनीति और व्हाइट कॉलर करप्शन जैसे विषयों पर गहरी पकड़ रखने वाले सुनील ने 2005 से शुरू हुए अपने करियर में कई बड़ी खबरें ब्रेक की हैं। जी20 शिखर सम्मेलन (G20 Summit) से लेकर केरल तक के चुनावी बयार को समझा। दिल्ली, बिहार और तेलंगाना में पत्रकारिता के विभिन्न आयामों को अनुभव करने वाले सुनील सोशल मीडिया एक्स (पहले ट्विटर) पर @sunilpandeyjee के जरिए सक्रिय रहते हैं।

सुनील का पत्रकारिता करियर प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग अनुभवों से समृद्ध है, जहां उन्होंने संपादन और ग्राउंड रिपोर्टिंग की महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। पटना, दिल्ली और हैदराबाद जैसे महानगरों में उन्होंने कई प्रतिष्ठित हस्तियों का साक्षात्कार किया है। उनकी ग्राउंड रिपोर्ट्स का प्रभाव इतना गहरा रहा है कि कई मौकों पर सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने और उनमें सुधार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सुनील पाण्डेय की पारखी नजर राजनीतिक उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियों के आम आदमी पर पड़ने वाले असर के विश्लेषण पर रहता है। डिजिटल युग की मांग को समझते हुए वे अपनी लेखनी और वीडियो, दोनों माध्यमों से नवभारत टाइम्स के पाठकों से जुड़ते हैं। उनमें किसी भी सामान्य खबर को राष्ट्रीय विमर्श (National Narrative) बनाने की अद्भुत क्षमता है। वे केवल समाचार देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खबर के पीछे के नैतिक मूल्यों और उसके व्यापक प्रभाव को गहराई से परखते हैं।

अपने पत्रकारिता सफर का आगाज सुनील ने प्रतिष्ठित पाक्षिक पत्रिका 'माया' से किया, जिसके बाद उन्होंने विभिन्न समाचार पत्रों के लिए स्वतंत्र स्तंभकार (कॉलमनिस्ट) के रूप में अपनी लेखनी को धार दी। ETV न्यूज की संपादकीय टीम के साथ संपादन और रिपोर्टिंग के गुर सीखने के बाद, उन्होंने ज़ी मीडिया और नेटवर्क 18 जैसे बड़े संस्थानों में एक लंबा समय बिताया। प्रिंट और टीवी न्यूज़ के व्यापक अनुभव के बाद, उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया। न्यूज़ इकोसिस्टम की गहरी समझ विकसित की। वर्तमान में वे टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के डिजिटल प्लेटफॉर्म 'नवभारत टाइम्स ऑनलाइन' में अपनी धारदार पत्रकारिता को जारी रखे हुए हैं।

सुनील पाण्डेय की शैक्षणिक नींव 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' माने जाने वाले पटना विश्वविद्यालय में पड़ी। यहां से ग्रेजुएशन और मास्टर के साथ ही उन्होंने पत्रकारिता की डिग्री भी प्राप्त की। वे समाचारों के विभिन्न स्रोतों के विश्लेषणात्मक अध्ययन और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों जैसे गंभीर विषयों पर अपनी लेखनी और व्याख्यानों के माध्यम से निरंतर विचार साझा करते रहते हैं। पत्रकारिता करियर के दौरान कई अवॉर्ड से सुनील पाण्डेय को सम्मानित किया जा चुका है।... और पढ़ें

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