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वाजपेयी के समय पेपर लीक क्यों नहीं होते थे?, जोशी ने मोदी सरकार की शिक्षा नीति, बजट और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर उठाए गंभीर सवाल?

वाजपेयी के समय पेपर लीक क्यों नहीं होते थे?, जोशी ने मोदी सरकार की शिक्षा नीति, बजट और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर उठाए गंभीर सवाल? By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: August 31, 2026 13:23 IST2026-08-31T13:22:16+5:302026-08-…

31 अगस्त 2026 को 08:29 am बजे
वाजपेयी के समय पेपर लीक क्यों नहीं होते थे?, जोशी ने मोदी सरकार की शिक्षा नीति, बजट और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर उठाए गंभीर सवाल?

सौजन्य से:- lokmatnews.in

वाजपेयी के समय पेपर लीक क्यों नहीं होते थे?, जोशी ने मोदी सरकार की शिक्षा नीति, बजट और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर उठाए गंभीर सवाल?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: August 31, 2026 13:23 IST2026-08-31T13:22:16+5:302026-08-31T13:23:36+5:30

‘विकसित भारत’ के लिए उन्होंने आधुनिक मानकों के बजाय मानवीय जीवन मूल्यों और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन पर जोर दिया.

नई दिल्ली: भाजपा के संस्थापकों में से एक, पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री और मार्गदर्शक मंडल के सदस्य डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की शिक्षा नीति, बजट और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं. एक समाचारपत्र को दिए साक्षात्कार में उन्होंने पेपर लीक, शिक्षा के व्यवसायीकरण, बजट में कटौती और ‘विकसित भारत’ की अवधारणा पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया. पेपर लीक को केवल परीक्षा व्यवस्था की नाकामी मानने के बजाय जोशी ने इसे समाज और शासन में बढ़ते भ्रष्टाचार से जोड़ा.

उन्होंने कहा कि जब छात्रों को शिक्षकों की नियुक्ति में रिश्वत और हर क्षेत्र में पैसे का बोलबाला दिखाई देता है, तो गलत रास्ते पर जाने में उनका संकोच कम होता है. उन्होंने सवाल किया, “वाजपेयी जी के समय पेपर लीक क्यों नहीं होते थे?” साथ ही कहा कि बैंकों, व्यापार और सरकार में घोटालों का असर शिक्षा और छात्रों पर भी पड़ता है.

पेपर लीक रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों और सेना तक के इस्तेमाल पर उन्होंने टिप्पणी की, “ऐसा लगता है जैसे यह परीक्षा नहीं, युद्ध छिड़ गया हो!” जोशी ने प्राथमिक शिक्षा और स्वास्थ्य के बजट में कमी तथा सड़कों और परिवहन पर बढ़ते खर्च पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सड़कें बनाना ही विकास नहीं है, इंजीनियर और कुशल मानव संसाधन चाहिए, जिसके लिए मजबूत शिक्षा व्यवस्था जरूरी है.

उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा को केवल मुनाफे का साधन बनाने का विरोध किया और कहा कि निजी क्षेत्र को कमाई का एक हिस्सा शिक्षा के विकास में लगाना चाहिए. ‘विकसित भारत’ के लिए उन्होंने आधुनिक मानकों के बजाय मानवीय जीवन मूल्यों और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन पर जोर दिया.

नई शिक्षा नीति पर उन्होंने कहा कि केवल इसलिए पुरानी नीति नहीं बदली जानी चाहिए कि वह राजीव गांधी सरकार के समय बनी थी. उन्होंने एनईपी-2020 में नीति आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाया. साथ ही अमीर-गरीब सभी बच्चों के लिए शुरुआती स्तर पर समान और मुफ्त शिक्षा की वकालत करते हुए नेबरहुड स्कूल सिस्टम को जरूरी बताया.

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