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पूर्व नक्सलियों ने किताब को बनाया हथियार, आठ ने पास की 10वीं की परीक्षा, भास्कर और 'नक्सल डॉ गीता' के हैं फर्स्ट डिवीजन

Ex Maoists Pass 10th Board Exam: बस्तर में सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने किताब को हथियार बनाया है। इसमें भी उन्हें सफलता मिली है। आठ पूर्व नक्सलियों ने फर्स्ट डिवीजन से 10वीं की परीक्षा पास की है। इसमें पूर्व बड़े नक्सली…

1 अक्टूबर 2026 को 04:02 am बजे
पूर्व नक्सलियों ने किताब को बनाया हथियार, आठ ने पास की 10वीं की परीक्षा, भास्कर और 'नक्सल डॉ गीता' के हैं फर्स्ट डिवीजन

सौजन्य से:- Navbharat Times

Ex Maoists Pass 10th Board Exam: बस्तर में सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने किताब को हथियार बनाया है। इसमें भी उन्हें सफलता मिली है। आठ पूर्व नक्सलियों ने फर्स्ट डिवीजन से 10वीं की परीक्षा पास की है। इसमें पूर्व बड़े नक्सली नेता भास्कर भी शामिल है।

हाइलाइट्स

छत्तीसगढ़ के पूर्व नक्सलियों के हाथ में बंदूक की जगह है कलम

किताब और कलम थामकर में पढ़ाई में दिखाई दिलचस्पी

आठ पूर्व नक्सलियों ने 10वीं ओपन बोर्ड की परीक्षा पास की

दंडाकारण्य कमिटी के पूर्व सदस्य भास्कर ने लाए फर्स्ट डिवीजन

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन के पूर्व आठ नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल से 10वीं कक्षा की परीक्षा पास की है। यह मुख्यधारा की जिंदगी अपनाने की दिशा में उनका बड़ा कदम है। बंदूक वालों हाथ में अब कलम है।

भास्कर ने फर्स्ट डिवीजन से पास की

परीक्षा पास करने वालों में कई बड़े पूर्व नक्सली नेता भी शामिल हैं। इनमें भास्कर भी हैं, जो कभी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमिटी के सदस्य थे और उन्होंने फर्स्ट डिवीजन से परीक्षा पास की है। इन आठ पूर्व विद्रोहियों ने इस साल 10वीं कक्षा की परीक्षा दी और सभी पहली बार में ही सफल रहे।

रोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा

बस्तर के आईजी बद्रीनारायम मीणा के अनुसार, यह पहल सरेंडर करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसकते तहत उन्हें अपनी रुचि और क्षमता के आधार पर शिक्षा, वोकेशनल ट्रेनिंग और रोजगार पाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

परीक्षा पास करने वालों में छह बस्तर जिले के

वहीं, इन आठ लोगों में से छह बस्तर जिले से हैं, जबकि एक-एक कांकेर और बीजापुर से हैं। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जो अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, उन्हें मदद दी जाएगी। परीक्षा पास करने वालों में 35 साल की गीता नरोटे भी शामिल हैं, जो मूल रूप से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की रहने वाली हैं।

छठी कक्षा में छोड़ दिया था स्कूल

परीक्षा पास करने वालों में शामिल गीता ने पारिवारिक हालात के कारण छठी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया था और बाद में लगभग दो दशक तक नक्सली संगठन में रहीं। उस दौरान, गीता ने घायल साथियों का इलाज करके मेडिकल स्किल सीखीं, जैसे जख्मों पर टांके लगाना, इंजेक्शन लगाना और दवाएं देना।

डॉक्टर गीता बुलाते थे लोग

संगठन के भीतर लोग उसे नक्सल डॉक्टर गीता बुलाते थे। सरेंडर करने के बाद गीता ने अपनी पढ़ाई शुरू की। 10वीं कक्षा में फर्स्ट डिवीजन हासिल किया। आगे वह पढ़ाई करना चाहती हैं और नर्सिंग करना चाहती हैं। ताकि जंगल में बिताए सालों के दौरान मिले मेडिकल अनुभव का इस्तेमाल कर सकें।

1990 में नक्सलियों के साथ आए भास्कर

तेलंगाना के रहने वाले भास्कर 1990 के दशक में नक्सल संगठन में शामिल हुए। इसके बाद धीरे-धीरे दंडाकारण्य कमिटी तक पहुंचे। उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गईं और वे कई तरह के हथियार चलाने में माहिर हो गए। हालांकि बस्तर में बिताए सालों ने उन्हें हिंदी और किताबों के करीब ला दिया। सरेंडर करने के बाद उन्होंने ओपन स्कूल से परीक्षा दी। फर्स्ट डिवीजन से पास हुए हैं।

कभी हथियार उनकी जिम्मेदारियों की पहचान हुआ करते थे, लेकिन अब वह किताबों को अपना हथियार बनाना चाहते हैं।

भास्कर, पूर्व नक्सली

पढ़ाई जारी रखने की योजना

वहीं, भास्कर अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं। अपने गांव और समुदाय के युवाओं को सीखने में रुचि लेने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही कांकेर की सन्नू ने भी 10वीं की परीक्षा पास कर ली है। वह अपने इलाके के लोगों की मुश्किलों को देखने के बाद संगठन में शामिल हुआ था। बाद में कमांडर बनने से पहले उसने आधुनिक और भारी हथियारों का प्रशिक्षण लिया।

सरेंडर करने के बाद पढ़ाई शुरू की

संगठन में शामिल होने के बाद सन्नू ने ग्रामीण और युवा कैडरों को ट्रेनिंग दी। सरेंडर के बाद उसने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की और अब उसे उम्मीद है कि वह अपनी शिक्षा जारी रखेगा। साथ ही अपने समुदाय के लिए काम करेगी। इस तरह के पुनर्वास का महत्व महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की 20 वर्षीय अरविंदा बरसागाडे की कहानी में भी दिखता है। उसके पिता, राजबाबू 2010 में आत्मसमर्पण करने से पहले 2005 में माओवादी संगठन में शामिल हुए थे।

लेखक के बारे मेंमुनेश्वर कुमारमुनेश्वर कुमार नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर (प्रमुख संवाददाता) हैं । वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को कवर करते हैं। इसके अलावे दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर कर देते हैं। पत्रकारिता की शुरुआत टीवी रिपोर्टिंग से हुई है। बीते 10 सालों से डिजिटल मीडिया में हूं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। चार साल तक टीवी में रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हूं। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हूं। डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी करता हूं। मध्य प्रदेश में दो लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव और नगर निकाय चुनाव को कवर किया। साथ ही कई बड़े इवेंट में ग्राउंड जीरो पर मौजूदगी रही है। टीवी और डिजिटल के बिहार में विधानसभा चुनाव को ग्राउंड से कवर किया हूं।

इसके साथ ही बिहार, राजस्थान, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में रहकर टीवी और डिजिटल पत्रकारिता के अलग-अलग गुर सीखे है। एमपी में रहते हुए सीएम मोहन यादव से लेकर पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान तक का इंटरव्यू किया हूं। इसके साथ ही एमपी के बड़े मंत्रियों, सेलिब्रिटी और अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं। इसके साथ ही अन्य राज्यों में भी इंटरव्यू किए। अन्ना आंदोलन के दौरान अन्ना हजारे का इंटरव्यू किया। मध्य प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिरने के पूरे प्रकरण को ग्राउंड जीरो से कवर किया।

विशेषता: पॉलिटिक्ल और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। इसकी शुरुआत महुआ न्यूज टीवी चैनल से हुई थी। फिर अलग-अलग टीवी चैनलों में काम करते हुए। ईनाडु इंडिया में पहुंचे जो अब ईटीवी भारत है। वहां लंबे समय तक रहने के बाद राजस्थान पत्रिका भोपाल में पहुंचे। पत्रिका में एक करीब एक साल तक रहने के बाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत हूं।... और पढ़ें

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