सात लाख स्टूडेंट्स वाले डीयू में हॉस्टल सिर्फ 7000, बाहरी छात्रों का सहारा बने पीजी-किराए के आवास - delhi university hostel shortage students rely on pgs
सात लाख स्टूडेंट्स वाले डीयू में हॉस्टल सिर्फ 7000, बाहरी छात्रों का सहारा बने पीजी-किराए के आवास दिल्ली के प्रमुख विश्वविद्यालयों जैसे डीयू, जेएनयू और आईआईटी दिल्ली में छात्रों के लिए हॉस्टल की भारी कमी है। लगभग ...और प…

सौजन्य से:- jagran.com
सात लाख स्टूडेंट्स वाले डीयू में हॉस्टल सिर्फ 7000, बाहरी छात्रों का सहारा बने पीजी-किराए के आवास
दिल्ली के प्रमुख विश्वविद्यालयों जैसे डीयू, जेएनयू और आईआईटी दिल्ली में छात्रों के लिए हॉस्टल की भारी कमी है। लगभग ...और पढ़ें
HighLights
- डीयू में 7 लाख छात्रों पर मात्र 7 हजार हॉस्टल सीटें।
- जेएनयू, आईआईटी दिल्ली में भी आवास की बड़ी कमी।
- हजारों छात्र पीजी और किराए के आवास पर निर्भर।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। देश के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शामिल डीयू, जेएनयू, आइआइटी, दिल्ली में देशभर से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं। इनमें करीब 50 प्रतिशत छात्र दूसरे राज्यों से आते हैं जिन्हें रहने के लिए हास्टल या पीजी की जरूरत पड़ती है। जेएनयू और आइआइटी दिल्ली में हास्टल की स्थिति तो कुछ हद तक ठीक है।
लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय के पास हास्टल की भारी कमी है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि करीब सात लाख (यूजी, पीजी, पीएचडी और अन्य) छात्र हैं। इनमें से करीब साढ़े तीन लाख बाहरी राज्यों के हैं जिनके लिए डीयू के पास हास्टल की मात्र सात हजार सीटें हैं।
यही वजह है कि डीयू के छात्रों को अपने कालेजों के आसपास पीजी में रहना पड़ता है। दक्षिणी दिल्ली परिसर में पढ़ने वाले छात्रों के लिए सत्य निकेतन पीजी का गढ़ बन चुका है तो नार्थ कैंपस के पास मुखर्जी नगर में पीजी की भरमार हो चुकी है। इनमें रहना छात्रों की मजबूरी बन चुकी है।
डीयू में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में करीब 71,600 स्नातक के नए छात्र जुड़े हैं। हर साल लगभग इतने छात्र नए आते हैं लेकिन उस अनुपात में हास्टल की क्षमता नहीं विकसित नहीं की जा रही है।
पीजी या किराए के आवास क मजबूरी
डीयू के नार्थ और साउथ कैंपस को मिलाकर लगभग 20 मुख्य विश्वविद्यालय हास्टल और कुछ चुनिंदा कालेज हास्टल हैं, जिनमें सीटों की संख्या लगभग सात हजार है। जबकि डीयू में कुल सात लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। डीयू की अधिकारिक बेवसाइट के अनुसार कुल 91 कालेज है।
इनमें से केवल 20 कालेज के पास अपना हास्टल है। वहीं 71 कालेज के पास अपना हास्टल नहीं है। वहीं जेएनयू और आइआइटी दिल्ली में पढ़ने वाले हजारों छात्रों के सामने सुरक्षित आवास की चुनौती भी बनी हुई है। जेएनयू में करीब 8,500 से 10,000 विद्यार्थियों के मुकाबले लगभग 5,500 छात्रों के लिए ही हास्टल सुविधा उपलब्ध है।
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वहीं आइआइटी दिल्ली में 12,500 से 13,000 छात्रों के मुकाबले करीब 7000–7500 आवासीय क्षमता है। यानी दोनों संस्थानों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कैंपस से बाहर पीजी या किराये के आवास पर निर्भर रहना पड़ता है।
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