होमकैंपसविचार रोजगारपरक शिक्षा का अभाव - NITI Aayog Report: India's Skill Gap & Employment Education Crisis
कैंपस

विचार रोजगारपरक शिक्षा का अभाव - NITI Aayog Report: India's Skill Gap & Employment Education Crisis

विचार: रोजगारपरक शिक्षा का अभाव नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, देश में रोजगारपरक शिक्षा की कमी है, जिससे 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में हैं और अधिकांश स्नातकों को योग्यतानुसार नौकरी नहीं मिल रही HighLights - नीति आयोग:…

30 अगस्त 2026 को 03:29 am बजे
विचार रोजगारपरक शिक्षा का अभाव - NITI Aayog Report: India's Skill Gap & Employment Education Crisis

सौजन्य से:- jagran.com

विचार: रोजगारपरक शिक्षा का अभाव

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, देश में रोजगारपरक शिक्षा की कमी है, जिससे 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में हैं और अधिकांश स्नातकों को योग्यतानुसार नौकरी नहीं मिल रही

HighLights

- नीति आयोग: 8.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में।

- कौशल विकास को रोजगार और करियर से जोड़ें।

- डिग्री पाठ्यक्रमों को उद्योग की जरूरतों से जोड़ना आवश्यक।

संजय गुप्त। कौशल विकास पर नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के कई निष्कर्ष चिंतित करने वाले हैं। इन दिनों युवाओं के हित की चिंता करती दिख रहीं केंद्र और राज्य सरकारों को इन निष्कर्षों पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश में जो नौकरियां सृजित हो रही हैं, उनके अनुरूप जैसी शिक्षा की आवश्यकता है, उसमें अनेक खामियां हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार 15 से 29 वर्ष के लगभग 8.7 करोड़ युवा न तो पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी तरह का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन्हें एनईईटी यानी नाट इन एजुकेशन, एम्पलायमेंट एंड ट्रेनिंग श्रेणी में रखा गया है। कुछ युवा लंबे समय तक रोजगार न मिल पाने के कारण एनईईटी श्रेणी में चले जाते हैं।

नीति आयोग के अनुसार कौशल विकास माडल को केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगार और करियर से जोड़ा जाना चाहिए। नीति आयोग ने यह पाया कि केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक ऐसा काम कर रहे हैं, जो उनकी योग्यता के अनुरूप है। इसका मतलब है कि अधिकांश युवाओं को अपनी योग्यता के हिसाब से नौकरियां नहीं मिल रही हैं। इसका कारण यही हो सकता है कि कारोबार जगत के पास जैसी नौकरियां हैं, उनके लायक युवा नहीं निखर पा रहे हैं।

आयोग के अनुसार समस्या सिर्फ बेरोजगारी की नहीं है, बल्कि पढ़ाई रोजगार के लिए जरूरी कौशल और उद्योग की जरूरतों के बीच तालमेल के अभाव की भी है। आयोग ने कमजोर व्यावहारिक अनुभव, उद्योग से कम जुड़ाव, सतही इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप एवं करियर गाइडेंस की कमी को प्रमुख चुनौतियों में गिना है। सरकारों को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए आगे आना होगा। आयोग ने स्कूलों के स्तर से ही उद्यमिता कौशल विकसित करने और रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करने का जो सुझाव दिया है, वह नया नहीं है। कठिनाई यह है कि ऐसे सुझावों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यह समय की मांग है कि छात्रों को स्कूल स्तर से ही रोजगार और उद्यमिता से जुड़े कौशल से लैस किया जाए। भले ही केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में विभिन्न मंत्रालयों के माध्यम से कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों के लिए लगभग 34 हजार करोड़ का प्रविधान किया हो, लेकिन नीति आयोग का मानना है कि प्रशिक्षण की पहुंच और रोजगार के परिणामों में अभी बड़ा अंतर है।

इस अंतर को पाटे बिना बात बनने वाली नहीं है। कौशल विकास के मामले में यह बात सामने आ रही है कि जिन संस्थाओं पर इसकी जिम्मेदारी है, वे अपना काम सही ढंग से नहीं कर पा रही हैं। इसका अर्थ है कि वे कौशल विकास के नाम पर खानापूरी कर रही हैं। कौशल विकास का काम तब तक सही तरह से नहीं होने वाला, जब तक योग्य प्रशिक्षकों की सेवाएं लेना सुनिश्चित नहीं किया जाता। कौशल विकास कार्यक्रमों की गुणवत्ता के साथ प्रशिक्षकों की गुणवत्ता पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा।

नीति आयोग के अनुसार जो युवा बीए, बीकाम की डिग्री लेकर नौकरी तलाश रहे हैं, उनके लिए कोई खास नौकरियां सामने नहीं आ रही हैं। इन डिग्रियों का नौकरी से सीधा जुड़ाव कमजोर है। कई छात्र इन डिग्रियों को इसलिए चुनते हैं, ताकि इनके जरिये सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की पात्रता मिल जाए। अब जब यह स्पष्ट है कि बीए, बीकाम और बीएससी की डिग्रियां सीधे रोजगार में नहीं बदलतीं तो फिर इनके पाठ्यक्रम में परिवर्तन किया जाना चाहिए।

आयोग ने सामान्य डिग्री कार्यक्रमों को रोजगार से जोड़ने के लिए जाब-लिंक्ड स्पेशलाइजेशन, इंडस्ट्री से जुड़े पाठ्यक्रम और वर्क-इंटीग्रेटेड डिग्री कार्यक्रम बढ़ाने का जो सुझाव दिया, उस पर अमल में देर नहीं होनी चाहिए। यह एक सही सुझाव है कि बीकाम के साथ एनालिटिक्स या डिजिटल मार्केटिंग, बीए के साथ रिटेल या हास्पिटैलिटी और बीएससी के साथ एप्लाइड टेक्नोलाजी जैसे विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने हाल में कहा था कि साफ्टवेयर नौकरियां और एमबीए डिग्री का दौर अब खत्म हो रहा है और वेल्डिंग, प्लंबिंग और बढ़ईगीरी जैसे ट्रेड स्किल्स को अधिक महत्व देना चाहिए। महज डिग्री लेने से कुछ बदलने वाला नहीं। इसलिए बेहतर होगा कि युवा किसी न किसी कौशल से लैस हों। इसी तरह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि मौजूदा विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम छात्रों को न तो नौकरी के लिए पर्याप्त रूप से तैयार करते हैं और न ही उद्यमी बनने के लिए।

यह ठीक है कि सरकार एआइ के व्यापक प्रभावों से परिचित है और इसके लिए आवश्यक तैयारी भी कर रही है, लेकिन उसे यह भी पता होना चाहिए कि एआइ का असर मौजूदा नौकरियों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। ऐसे में यह आवश्यक है कि नौकरी पाने के इच्छुक या नई नौकरी में जा रहे युवाओं को भी एआइ के कौशल से लैस किया जाए। यह एक विडंबना ही है कि इतनी बड़ी आबादी वाले देश में हम ऐसी शिक्षा व्यवस्था निर्मित नहीं कर सके हैं कि छात्र या तो किसी नौकरी के लिए तैयार होकर निकलें या फिर अपना काम शुरू करने की क्षमता हासिल कर सकें।

जबसे काकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को त्यागपत्र देना पड़ा, तबसे लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि भारत में शिक्षा पर जैसा ध्यान दिया जाना चाहिए था, वैसा नही दिया गया, लेकिन इसमें अकेले केंद्र सरकार की कमी नहीं। राज्यों के स्तर पर भी शिक्षा पर सही तरह ध्यान नहीं दिया जा रहा है, खास तौर से उत्तर भारत में। पिछले दिनों जब काकरोच जनता पार्टी ने राजस्थान के स्कूलों की जर्जर हालत की पोल खोली, तब राज्य सरकार द्वारा उनकी दशा सुधारने के लिए धनराशि जारी की गई। आखिर यह काम पहले क्यों नहीं हो सकता था?

स्कूली शिक्षा हो या कौशल विकास अथवा प्रशिक्षण के कार्यक्रम, इनकी पूरी जिम्मेदारी सरकारों को ही उठानी पड़ेगी। आज भारत की आर्थिक वृद्धि दर छह-सात प्रतिशत ही है। इसमें वृद्धि न हो पाने का एक कारण गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक शिक्षा की कमी भी है। अब जब विकसित भारत की बात हो रही है तब शिक्षा पर समुचित ध्यान न देना एक बड़ी गलती ही होगी।

(लेखक दैनिक जागरण के प्रधान संपादक हैं)

Powered by शिक्षा खबर Skillogy

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
युवाओं को साधने में जुटा छात्र जदयू! मुंगेर में बोले प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेल- नीतीश सरकार में शिक्षा का हुआ कायाकल्प
 - nitish kumar vision bihar education reforms youth empowerment
कैंपस

युवाओं को साधने में जुटा छात्र जदयू! मुंगेर में बोले प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेल- नीतीश सरकार में शिक्षा का हुआ कायाकल्प - nitish kumar vision bihar education reforms youth empowerment

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme; 20 lakh students to benefit
कैंपस

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme; 20 lakh students to benefit

'मातृभाषा के साथ दूसरी भाषा भी जानें': महाराष्ट्र से अमित शाह ने क्या संदेश दिया? नई शिक्षा नीति पर भी बोले
कैंपस

'मातृभाषा के साथ दूसरी भाषा भी जानें': महाराष्ट्र से अमित शाह ने क्या संदेश दिया? नई शिक्षा नीति पर भी बोले

PM श्री स्कूल: शिक्षा में खामियां, अधिकारी चिंतित
कैंपस

PM श्री स्कूल: शिक्षा में खामियां, अधिकारी चिंतित

CCSU में बड़ा विवाद: कैंपस में प्रवेश से बैन हुए छात्रों ने VC की 'नो एंट्री' की उठाई मांग   
 - ccsu vc banned students demand campus ban on vice chancellor sangeeta shukla
कैंपस

CCSU में बड़ा विवाद: कैंपस में प्रवेश से बैन हुए छात्रों ने VC की 'नो एंट्री' की उठाई मांग - ccsu vc banned students demand campus ban on vice chancellor sangeeta shukla

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme, more than 20 lakh students to benefit
कैंपस

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme, more than 20 lakh students to benefit

कॉलेजों में प्रवेश: 19 तक मौका लेकिन तीन दिन छुट्टी होने से दाखिले के लिए मिलेंगे महज 4 दिन - Bilaspur (Chhattisgarh) News
कैंपस

कॉलेजों में प्रवेश: 19 तक मौका लेकिन तीन दिन छुट्टी होने से दाखिले के लिए मिलेंगे महज 4 दिन - Bilaspur (Chhattisgarh) News

Are young Indian men starting to give up on college education?
कैंपस

Are young Indian men starting to give up on college education?

ताज़ा ख़बरें