होमकैंपसविचार स्कूली कक्षाओं को चाहिए योग्य शिक्षक - Qualified Teachers: Key to India's Future Leadership & Reform
कैंपस

विचार स्कूली कक्षाओं को चाहिए योग्य शिक्षक - Qualified Teachers: Key to India's Future Leadership & Reform

विचार: स्कूली कक्षाओं को चाहिए योग्य शिक्षक केवल विद्यार्थी के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षक के रूप में भी, ताकि वे भारत को जान सकें और समय आने पर उसका नेतृत्व कर सकें। HighLights - युवा स्नातक जमीनी हकीकत समझने के लिए स्कू…

5 सितंबर 2026 को 05:29 am बजे
विचार स्कूली कक्षाओं को चाहिए योग्य शिक्षक - Qualified Teachers: Key to India's Future Leadership & Reform

सौजन्य से:- Jagran

विचार: स्कूली कक्षाओं को चाहिए योग्य शिक्षक

केवल विद्यार्थी के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षक के रूप में भी, ताकि वे भारत को जान सकें और समय आने पर उसका नेतृत्व कर सकें।

HighLights

- युवा स्नातक जमीनी हकीकत समझने के लिए स्कूलों में पढ़ाते हैं।

- शिक्षण केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि नेतृत्व और मूल्य सिखाना है।

- भारत के विकास हेतु योग्य शिक्षकों की अनिवार्य आवश्यकता है।

प्रमथ राज सिन्हा। कुछ महीने पहले मुझे ऐसे युवाओं के साथ समय बिताने का अवसर मिला, जो दो वर्षों से देश के अलग-अलग भागों में कम संसाधनों वाले स्कूलों में शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। ये युवा इंजीनियरिंग, अर्थशास्त्र, वकालत, पत्रकारिता और साहित्य के ग्रेजुएट्स हैं और इनमें से किसी का भी लक्ष्य शिक्षक बनना नहीं था। उनका बस एक उद्देश्य था-स्कूल में पढ़ाकर उस भारत से परिचित होना, जो उनके अनुभवों से अलग है। इन ग्रेजुएट्स को साफ दिखाई दे रहा था कि समाज और देश को किन बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है और कहां बदलाव लाना जरूरी है। आखिर इन युवाओं में ऐसा क्या अलग था? मेरा निष्कर्ष है कि पढ़ाना ही नेतृत्व करना है। स्कूल में पढ़ाने का मतलब है अपना सर्वश्रेष्ठ देना।

शिक्षक की जिम्मेदारी सिर्फ छात्रों की पढ़ाई तक ही सीमित नहीं रहती। वे उन्हें समय की पाबंदी, सहानुभूति और ईमानदारी जैसे मूल्य सिखाते हैं। वे सुनिश्चित करते हैं कि विद्यार्थी नियम से स्कूल आएं, क्लास की गतिविधियों में हिस्सा लें और विश्वास रखें कि उनके भीतर भी क्षमता है। विद्यार्थी जितना शिक्षकों के शब्दों से सीखते हैं, उतना ही उनके आचरण से। जब शिक्षक विद्यार्थियों को एकाग्रता के साथ बेहतर करने और अच्छा भविष्य रचने की सीख देते हैं, तो उसका प्रभाव आगे चलकर समाज और देश पर पड़ता है। जब शिक्षक किसी ऐसे स्कूल में पढ़ाते हैं, जहां संसाधनों की कमी हो तब ये बातें और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं, क्योंकि यही वह जगह है, जहां भारत की चुनौतियां अपने सबसे स्पष्ट रूप में दिखाई देती हैं।

किसी कम आय वाले इलाके की आठवीं कक्षा की कल्पना कीजिए। शिक्षक को पहले ही हफ्ते पता चल जाता है कि कई बच्चों का पढ़ने का स्तर दूसरी कक्षा का है। स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित, कुपोषण, आर्थिक तंगी से परेशान ये बच्चे क्या ध्यान लगाकर पढ़ पाएंगे? जात-पात, लिंग भेद, पंथ-संप्रदाय, सभी का असर इस पर पड़ता है कि कौन कक्षा में बोलेगा, कौन घर से काम करके ला पाएगा और कौन भविष्य के सपने देखने का साहस करेगा। सेकेंडरी स्कूल तक पहुंचते-पहुंचते बच्चों के सामने मोबाइल स्क्रीन और डिजिटल मीडिया की दुनिया खुल जाती है, जहां अक्सर बड़ों से उन्हें पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। बच्चों के विकास के इन महत्वपूर्ण दिनों में एक शिक्षक की जिम्मेदारी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि और अधिक जटिल और बहुआयामी बन जाती है।

कल्पना कीजिए कि एक युवा शिक्षक पूरी तैयारी के साथ कक्षा में पहुंचता है। उसे चंद ही मिनटों में पता चल जाता है कि कई विद्यार्थी पाठ्यक्रम की किताब तक ठीक से पढ़ नहीं पा रहे हैं। तब वह किताब को परे रखकर, परिस्थिति के अनुसार अपना तरीका बदलता है। वह पढ़ाने के सरल तरीके ढूंढ़ता है, कहानियां सुनाता है और उन कहानियों को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ता है। पढ़ाने के तरीके में इस तरह के बदलाव करना एक आम बात है। ऐसे अनुभव इस विश्वास को जन्म देते हैं कि गहरी चुनौतियों के बावजूद भारत में अभूतपूर्व सामाजिक सुधार और विकास की संभावना है। जब शिक्षक देखते हैं कि जिस बच्चे से जून में कोई उम्मीद नहीं थी, वह अक्टूबर आते-आते पूरा पाठ सस्वर पढ़ रहा है, तब वे यह बात दिमाग से निकाल देते हैं कि देश कभी बदल नहीं सकता।

शिक्षक देख लेते हैं कि जो संभव है, वह साकार भी हो सकता है। नगर निगम स्कूल में दूसरी कक्षा के बच्चों को पढ़ा रहे एक स्नातक ने दो ही वर्षों में विद्यार्थियों में तीन सालों की शैक्षणिक प्रगति दिखाई, स्कूल व्यवस्था को बदला और अपने प्रयास को सफल बनाने के लिए कारपोरेट साझेदारी से समर्थन जुटाया। आज वह एक विश्वस्तरीय कंसल्टिंग फर्म में लीडर हैं। टीच फार इंडिया, भूमि, गांधी फेलोशिप और एजुकेट गर्ल्स जैसी पहलों ने ऐसे युवा स्नातकों का समूह तैयार किया, जो देश की जमीनी सच्चाइयों से परिचित हैं। ये स्नातक अब टेक्नोलाजी, कंसल्टिंग और सामाजिक उद्यम के क्षेत्रों में संस्था निर्माता, विचारक एवं उद्यमियों के रूप में काम कर रहे हैं।

देश में स्नातकों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इनमें से कई ऐसे हैं, जो देश के लिए कुछ करने के लिए तत्पर हैं। सवाल यह है कि क्या उन्हें देश की जमीनी सच्चाई की समझ है? जिस तरह कई देशों में युवाओं की फौज में भर्ती अनिवार्य है, उसी तरह शायद भारत में हर युवा को शिक्षण में अनिवार्य भर्ती शुरू करनी चाहिए। जिसकी इच्छा पढ़ाने की न हो, वह किसी और रूप में स्कूल में योगदान दे। नौकरीपेशा लोग भी किसी विद्यालय को हर हफ्ते अपने कुछ घंटे दें। इससे आत्मविश्वास के साथ देश की समस्याओं को सुलझाने वाला युवा वर्ग तैयार होगा। भारत ही एक ऐसा देश है, जहां इतनी विविधता, इतने सारे काबिल लोग और इतने जरूरतमंद स्कूली बच्चों का संयोजन है। समस्याओं के उपाय खोजने के लिए हमें किसी और देश की ओर देखने की आवश्यकता नहीं है। स्थिति, सामर्थ्य और आशा, सब हमारे पास हैं। हमें अपनी स्कूली कक्षाओं में और काबिल लोग चाहिए। केवल विद्यार्थी के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षक के रूप में भी, ताकि वे भारत को जान सकें और समय आने पर उसका नेतृत्व कर सकें।

(लेखक टीच फॉर इंडिया सहित अशोका विश्वविद्यालय एवं इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस बोर्ड के सदस्य हैं)

Powered by शिक्षा खबर Skillogy

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
युवाओं को साधने में जुटा छात्र जदयू! मुंगेर में बोले प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेल- नीतीश सरकार में शिक्षा का हुआ कायाकल्प
 - nitish kumar vision bihar education reforms youth empowerment
कैंपस

युवाओं को साधने में जुटा छात्र जदयू! मुंगेर में बोले प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेल- नीतीश सरकार में शिक्षा का हुआ कायाकल्प - nitish kumar vision bihar education reforms youth empowerment

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme; 20 lakh students to benefit
कैंपस

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme; 20 lakh students to benefit

'मातृभाषा के साथ दूसरी भाषा भी जानें': महाराष्ट्र से अमित शाह ने क्या संदेश दिया? नई शिक्षा नीति पर भी बोले
कैंपस

'मातृभाषा के साथ दूसरी भाषा भी जानें': महाराष्ट्र से अमित शाह ने क्या संदेश दिया? नई शिक्षा नीति पर भी बोले

PM श्री स्कूल: शिक्षा में खामियां, अधिकारी चिंतित
कैंपस

PM श्री स्कूल: शिक्षा में खामियां, अधिकारी चिंतित

CCSU में बड़ा विवाद: कैंपस में प्रवेश से बैन हुए छात्रों ने VC की 'नो एंट्री' की उठाई मांग   
 - ccsu vc banned students demand campus ban on vice chancellor sangeeta shukla
कैंपस

CCSU में बड़ा विवाद: कैंपस में प्रवेश से बैन हुए छात्रों ने VC की 'नो एंट्री' की उठाई मांग - ccsu vc banned students demand campus ban on vice chancellor sangeeta shukla

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme, more than 20 lakh students to benefit
कैंपस

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme, more than 20 lakh students to benefit

कॉलेजों में प्रवेश: 19 तक मौका लेकिन तीन दिन छुट्टी होने से दाखिले के लिए मिलेंगे महज 4 दिन - Bilaspur (Chhattisgarh) News
कैंपस

कॉलेजों में प्रवेश: 19 तक मौका लेकिन तीन दिन छुट्टी होने से दाखिले के लिए मिलेंगे महज 4 दिन - Bilaspur (Chhattisgarh) News

Are young Indian men starting to give up on college education?
कैंपस

Are young Indian men starting to give up on college education?

ताज़ा ख़बरें