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नई शिक्षा नीति के तहत शत-प्रतिशत लोगों को साक्षर करना जरूरी : मनमोहन साहु

नई शिक्षा नीति के तहत शत-प्रतिशत लोगों को साक्षर करना जरूरी : मनमोहन साहु उल्लास कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के असाक्षर लोगों को बुनियादी साक्षरता और कौशल प्रदान करता है। झारखंड…

20 सितंबर 2026 को 02:02 pm बजे
नई शिक्षा नीति के तहत शत-प्रतिशत लोगों को साक्षर करना जरूरी : मनमोहन साहु

सौजन्य से:- Hindustan

नई शिक्षा नीति के तहत शत-प्रतिशत लोगों को साक्षर करना जरूरी : मनमोहन साहु

उल्लास कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के असाक्षर लोगों को बुनियादी साक्षरता और कौशल प्रदान करता है। झारखंड के कर्रा प्रखंड में आयोजित परीक्षा में 1287 असाक्षरों ने भाग लिया, जिनमें 676 महिलाएं और 611 पुरुष शामिल हैं।

कर्रा, प्रतिनिधि। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के असाक्षर लोगों को बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान और महत्वपूर्ण जीवन कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से उल्लास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के माध्यम से संचालित इस कार्यक्रम के तहत प्रखंड के सभी विद्यालयों को जन चेतना केंद्र बनाया गया है। जन चेतना केंद्रों के प्रभारी शिक्षकों द्वारा क्षेत्र में असाक्षरों का सर्वेक्षण कर उनका ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण किया गया है। चिन्हित असाक्षरों के लिए वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित की जाती है। इसी क्रम में रविवार को कर्रा प्रखंड के सभी जन चेतना केंद्रों पर उल्लास परीक्षा आयोजित हुई। परीक्षा में कुल 1287 असाक्षरों ने भाग लिया। इनमें 676 महिलाएं और 611 पुरुष शामिल थे.

कार्यक्रम के महत्व

प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनमोहन साहु ने कहा कि उल्लास कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संचालित महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। वित्तीय वर्ष 2022-27 तक झारखंड समेत पूरे देश में शत-प्रतिशत असाक्षरों को साक्षर करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी स्तरों पर प्रयास जरूरी है।

परीक्षा में भाग लेने वाले

परीक्षा में शामिल परीक्षार्थी भी काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि बचपन में माता-पिता द्वारा विद्यालय नहीं भेजे जाने और घरेलू कार्यों में व्यस्त रहने के कारण वे पढ़ाई नहीं कर सके। सरकार की पहल से अब पढ़ने-लिखने का अवसर मिला है। परीक्षार्थियों ने कहा कि अब वे अंगूठा लगाने के बजाय अपना नाम लिख सकेंगे।

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